Bhajan that connects with spirituality...

Murli

                            श्री 

थारी मुरली मनड़ो मोयो कान्हा

फेर तो बजायी थारी मुरली न

आ मुरली कामणगारी कान्हा

फेर तो बजाई थारी मुरली न 

फेर तो बजाई कान्हा और तो बजाई

फेर तो बजाई थारी मुरली न

फेर तो बजाई......


आ मुरली,नरसी न मोही,छप्पन करोड़ की माया लुटाई

नानी बाई को मायरो भरायो कान्हा

फेर तो बजाई......


आ मुरली तो द्रोपदी न मोही

भरी सभा में द्रोपदी झुर झुर रोई 

चीर को ढेर लगायो कान्हा

फेर तो बजाई....


आ मुरली करमां बाई न मोही

खीचड़ो बनार करमा राम न रिझाई

धाबलिया रो पड़दो लगायो कान्हा 

फेर तो बजाई.......



आ मुरली मीरा बाई न मोही, 

राणाजी न छोड़ मीरा थांरे संग होई 

मेड़तियो छिटकायो कान्हा

फेर तो बजाई........


आ मुरली धन्ना भगत न मोही

बीज बांट संता ने दिन्या 

बिना बीज खेत निपजायो कान्हा

फेर तो बजाई.…...


आ मुरली बृजबाला न मोही

लोक लाज़ छोड़ कर थारे लारे होई 

वन में रास रचायो कान्हा

फेर तो बजाई.....


आँख फरुक कान्हा हिचकी आवे

पल पल थारी याद सतावे 

एक झलक दिखलाई कान्हा

फेर तो बजाई......


एड़ छेड़ नदी रे कदम्बलो 

बीच में बैठो नंदजी रो लालो

झीणी झीणी तान सुणाई कान्हा

फेर तो बजाई........


याद करे तने नित री राधा

सावण आवंण रो कर गयो वादा

करियोड़ो कौल निभाई कान्हा

फेर तो बजाई........



याद करे थाने नित री राधा

सावण आवण रा कर गया वादा

करियोडा कौल निभाओ कान्हा

फेर तो बजाई......


आंखडल्या फरुक म्हान हिचकी आवे

पल पल थारी याद सतावे

गायां रा गीवाल्या घर आवो कान्हा

फेर तो बजाई थारी मुरली न 

एक झलक दिखलाई कान्हा


फेर तो बजाई.......

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