श्री
हाथ में लकड़ी,कान पकड़ कर, माँ धमकावे रे
ओ त्रिलोकी रो नाथ,बृज में माटी खावे रे
गायां चरावण जावे सगला सु पहली
सगला सु छान माटी मुंडे में मेली
कोई चुगली किन्हीं ग्वाल बाल, मैया न सिलावे रे
देखो त्रिलोकी.....
मैया तो केव कन्हैया क्यूँ खाई माटी
दूध,दही माखन न, कदेई ना नाटी
कोई कान्ह कुँवर तो मुंह नहीं खोले, नाड हिलावे रे
देखो त्रिलोकी......
कान्हो तो मुंडो खोल्यो,देखो नि माई
मुंडे में देख त्रिलोकी,मैया घबराई
कोई देवी देवता करे वन्दना,पार ना पावे रे
देखो त्रिलोकी...…
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