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माँ को श्रद्धांजलि


                               श्री 

ओजी ओ मायड़ थारी याद म्हाने भौत सतावे जी


कद बीत्यो,बचपन,युवापन, म्हाने हुयो नहीं आभास 

थारे,आँचल री छाया में ,नित ही रहयो उल्लास

नित ही,मौज उड़ाई जी

नित ही मौज,उड़ाई जी,रही थारी छत्तर छाया जी

ओजी ओ मायड़....


थांरे जाण सु लागे है, जग सूंनो सो आज

थां , बिन म्हारी कुण सुणलो, इंण मनड़े री बात

चिन्ता कुण करेलो जी

चिन्ता कुण,करेलो जी,या पीड़ा कुण हरेलो जी


ओजी ओ मायड़.....



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