श्री
थे भूल ज्यो सब कुछ मगर माँ बाप ने मत भूलज्यो
कर्जो घणो माँ बाप रो, सिर पर चडियो मत भूलज्यो
मुखड़ो तुम्हारो देखने हित, देवता पूजा घणा
जनमा जणा हरख़्या घणा, ई बात न मत भूलज्यो
चढ़ डागल थाली बजा,सगलो कुटुंब भेलो करियो
गुड़ गाँव में घर घर बंटायो , कोड यो मत भूलज्यो
थे चुंगता रोगी हुया,खाई दवाई मावड़ी
टूणा करया, निजरां उतारी, बा घड़ी मत भूलज्यो
टुक तोड़ मुख रो गासीयो, गोडा बिठा मुख में दियो
थे उगल पाछो थूक भरता, बा घड़ी मत भूलज्यो
जद गंदगी सु अंगुलियां भर थे लकीरां माण्डता
तब हाय छी छी कर नुवायो बा घड़ी मत भूलज्यो
आ रुत सियाली रात आधी, मूत गुदड़ा गालता
गिला में सो, सूखा में सुलाती, बा बगत मत भूलज्यो
अब तो बड़ी बातां बनावो, देंण सब मां बाप की
थे छेद मत करज्यो कलेजे,वचन यो मत भूलज्यो
मात कैकेई,पिता दशरथ, वचन प्रभु टाल्या नहीं
श्री राम जीत्या लंक न,सियाराम न मत भूलज्यो
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