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हनुमत आराधना

                          श्री

हनुमान,बलवान,अंजनी के प्यारे

रामजी के काज सारे तुमने संवारे

संकटमोचन नाम तेरा,भक्त पुकारे

भक्तों को संकट से तूं ही उबारे 

हनुमान,बलवान.......


सागर को देख सब वानर गए हार 

लाँघ के समुद्र,कौन जाए उस पार 

जामवंत बोले तब वचन उच्चार 

उठो बजरंगी,उठो पवनकुमार 

हनुमान,बलवान,राम के प्यारे

बिगड़े हुए काज कपि तूं ही सुधारे 

हनुमान,बलवान.......


सागर को लांघ गये पल में हनुमान

माता को मुंदरी देकर ,बोले जय श्री राम 

देकर आशीष बोली, जनकदुलारी 

सदा अनुकूल रहे, अवधबिहारी 

हनुमान,बलवान, सिया के दुलारे,

रामजी के सगरे काज तूं ही सुधारे 

हनुमान,बलवान ......


लंका जलाय बलवीर पधारे

रामादल में खुशियों के गूंजे हैं नारे

नैनों में नीर भरे,बोले हैं श्री राम 

तुम हो कपि प्यारे मोहे,भरत के समान

हनुमान,बलवान,सियाराम के प्यारे

रामजी के अटके काज,तूं ही सँवारे 

हनुमान,बलवान......


भक्तों के जीवन में ,संकट है छाए 

अँधेरों से घिरे,कोई राह ना पाये 

पुष्पा की पुकार बाबा,हाथ लेना थाम 

बिगड़ी सबकी बन जाए, और मिल जाएं श्री राम 

हनुमान,बलवान,भक्तों के प्यारे

भक्तों के बिगड़े काज तूं ही सुधारे

हनुमान,बलवान......

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