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गोवर्द्धनधारी

                             श्री

नख पर धार लियो गिरिराज,नाम गिरिधारी पायो है 

नाम गिरिधारी पायो है,नाम बनवारी पायो है 

नख पर.....


सुरपति पूजा मेट आप गिरिराज पूजायो है 

सवा लाख मण सामग्री को भोग लगायो है 

नख पर.....


ख़बर पड़ी जब इन्द्रलोक में,इंद्र रिसायो है 

सात रात अरु दिन,प्रलय को मेह बरसायो है 

नख पर.....


सब बृज इकठ्ठा होय आप, गिरिराज उठायो है 

पड़ी न बृज पर बूंद देख,सुरपति घबरायो है 

नख पर......


सुरभि, गाय, रतन,घोड़ा, एरावत लायो है 

चरणन में गिर नाथ क्षमा,अपराध करायो है 

नख पर......


धन्य धन्य बृजराज,इंद्र को मान घटायो है 

घासीराम बृजवासी ने कथ, गाय सुनायो है 

नख पर......

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