श्री
बृजराज थे बेगा आइजो, म्हाने चोखी फाग खेलाई ज्यो जी
बृजराज थे......
संग राधा प्यारी ल्याई ज्यो,थे जी भर रंग लगाई ज्यो जी
बृजराज थे...…
थांरे संग सखियां री टोली,सब मिलकर केशर घोली जी
बृजराज थे....
थां ने सखियां गाली गावे, हँस हँस कर रस बरसावे जी
बृजराज थे.....
थां ने निकलेसर पहरावा,फिर नई सी नार बनावा जी
बृजराज थे.....
थे मन ना करियो छोटो,जी भर फागुन रस लूटो जी
बृजराज थे.......
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