श्री
ख़ूब सज्यो सिणगार थांरो, सांचो है दरबार
थांरी होवे जै जैकार,बालाजी म्हारा
मुलके छ जी मूलक छ
सालासर सरदार थांरे,सिर पर मुकुट विराजे जी
चाँदी रो दरबार सलूणो,ढोल नगाड़ा बाजे जी
गल फुलां रो हार बालासा,लटके छतर अपार
बालाजी म्हारा......
लाल सिंदूरी चोलो थांरे,माथे तिलक विराजे जी
हाथां में खड़ताल है बाबा,पांव पैंजणिया साजे जी
चलघट की बलिहार बाला सा,लेंऊं नज़र उतार
बालाजी म्हारा.....
दूर दूर सु दरशण ख़ातिर, नर नारी दर आवे जी
पान सुपारी,ध्वजा नारियल, लाडू भेंट चढ़ावे जी
भक्त खड़ा थांरे द्वार बाला सा, दोनु हाथ पसार
बालाजी म्हारा...….
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