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मात अनुसूइया ने डाल दिया पालना....

                             श्री 

मात अनुसूइया ने डाल दिया पालना 

झूल रहे तीन देव,बनकर के लालना 


बालक की भांति प्रभु रुदन मचावे

ब्रम्हा और शिव को संकेत में बतावे

लेने आए भेद,यहां गली नहीं दाल ना 

झूल रहे.....


मारे ख़ुशी के वो फूली ना समाती 

कभी लेती गोद,कभी झूला झूलाती 

आज मेरे भाग्य की क्या करूं ,सराहना

झूल रहे......


मन में उमंग भरे माता पुचकारे

रोवो नहीं लाल ऐसे वचन उच्चारे

खाओ, पीवो,खेलो पर करो नहीं चाल ना 

झूल रहे......


मेरे घर आये मुझे देने बड़ाई 

भूल गए आज अपनी सारी चतुराई 

भारत की देवियों से आज पड़ा सामना

झूल रहे......


स्वर्ग लोक छोड़ मृत्युलोक में पधारे

ऋषियों की कुटिया में करने गुज़ारे 

रो रो के फुलावे वो तो अपने अपने गाल ना 

झूल रहे.....


कोई गुरुडपाल,कोई सृष्टि के रचैया 

कोई बैठे नांदिया पे,डमरू बजैया 

तनमन में नाच रहे,पूछे कोई हाल ना 

झूल रहे......


नभ पर विमान चढ़े,देवता निहारे

बाल रूप देख देख नैना नीर डारे 

ऐसे फँसे तीन देव,पूछे कोई हाल ना 

झूल रहे..... 

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