श्री
उत्सव मनाओ जी,घर को सजाओ जी
मंगल गाओ जी,धूम मचाओ जी
घर आये नन्दलाल, संग लेके छोटी सी किशोरी
घर आये है गोपाल,संग लेके राधे जू प्यारी
वृन्दावन का कुंवर कन्हैया ,करता है हरदम ता ता थैया
गोपियों के घर जाये, हण्डिया फोड़ गिराये
नित नई रार मचाये,सबको ख़ूब सताये
माखन चुराने वाला,सबको नचाने वाला
छोड़ के बंशीवट,आया है बंशी वाला
मन में हरख अपार,संग आई राधा जू प्यारी
बरसाने की कुंवरी राधिका,संग में सखियाँ विशाखा,ललिता
कान्हा से मिलने जाए,नई नई जुगत बिठाये
पनियां भरन कभी जाए,कान्हा संग रास रचाए
छोड़ वो पनघट, और वो यमुनातट
आई है उनके संग में, जिनके सिर मोर मुकुट,
करके करुणा अपार, आई मेरी प्यारी सी किशोरी
भाव से इनको जो भी बुलाए,प्रेम डोर से बंधे चले आयें
प्रीत की रीत निभाये,भक्तों का मान बढ़ाए
मुरली मधुर बजाये,सबको दीवाना बनाए
वहीं है बंशीवट,वहीं है यमुनातट
वहीं है पनघट , जहां मेरा नटखट
कान्ह बजाये मीठी तान, और नाचे राधा किशोरी
पुष्पा तेरा लाड़ लड़ाए,मीठे भजनों से ख़ूब रिझाए
युगल चरण छवि प्यारी, लेंऊं मैं नज़र उतारी
करके अनुग्रह भारी,आई मेरी राधे प्यारी
साथ बस यूँही निभाना, चरणों में देना ठिकाना
श्याम मण्डल गुण गाये,सबपे किरपा बरसाना
आनन्द बरसे अपार,घर आई प्यारी किशोरी
सखियां सब आओ री,झूला सजाओ री
कान्हा संग राधे जू को,झूला झुलाओ री
सावन की बरसे फुहार ,आए मेरे बांकेबिहारी
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