श्री
छम छम करती, अन्न धन भरती
मैया लक्ष्मी पधारो म्हारे आंगणा
मैया सागर के मंथन से आई
आके,विष्णु जी को जाकर ब्याही
हरि को साथ लेके,कमल हाथ लेके
मैया लक्ष्मी.......
शेष शैय्या पे आसन लगावे
अपने स्वामी के चरण दबावे
वेद ध्यान धरते, गुणगान करते
मैया लक्ष्मी.......
तेरे माथे पे मुकुट निराला
कानों में कुण्डल,गले में माला
गले में हार चमके,तिलक भाल दमके
मैया लक्ष्मी.......
सारी दुनिया में तेरी है माया
सुख समृद्धि तेरी है छाया
रिद्धि सिद्धि देती,शुभ लाभ करती
मैया लक्ष्मी......
मैया हम हैं माया में भरमाए
तू ही बिगड़ी हमारी बनाये
सुख बांट जाओ, दुःख काट जाओ
मैया लक्ष्मी.......
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